Thursday, 21 June 2012

सात लाख में मिलता है सेक्स पावर बढ़ाने वाला कीड़ा


increasing sexual power worm cost is seven lakh
माचिस की डिबिया में समाने और साधारण से दिखने वाले कीड़े की कीमत सात से आठ लाख रुपये तक हो सकती है, यकीन नहीं होता लेकिन यह सच है। इसे देखना हो तो बद्रीनाथ धाम के रास्ते पड़ने वाले जोशीमठ की तरफ आइए। इस कीड़े के बेशकीमती होने के पीछे यौन शक्ति बढ़ाने में इसकी अद्भुत उपयोगिता है।

यौन शक्तिवर्धक दवा बनाने के लिए उत्तराखंड के वन्य जीवों के अंगों के साथ ही इस कीड़े की अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे ज्यादा मांग है। राज्य के ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाली जड़ी-बूटियों की मांग से जुड़ा यह एक चमत्कारिक पहलू है।

चमोली जिले के जोशीमठ, दशोली और घाट क्षेत्रों के बुग्याली हिस्सों में कीड़ा जड़ी यानी कीड़े के मरने से बनने वाली जड़ी के ऊंचे दाम मिलने के कारण यहां इनका जमकर दोहन हो रहा है। अब तस्करों की निगाह इसके जिंदा कीड़े पर लग गई है। तस्कर एक कीड़े के सात लाख रुपये तक दे रहे हैं। तस्कर बुग्याली क्षेत्र जैसा तापमान बनाए रखने के लिए आइस बॉक्स लेकर आ रहे हैं, जिसमें वे कीड़े रखकर ले जा रहे हैं।

वन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि कीड़ा जड़ी का कीड़ा बुग्याली क्षेत्र के बाहर के तापमान में जिंदा नहीं रह सकता। वन विभाग ने इस जड़ी के दोहन के लिए वन पंचायतों को अधिकृत किया है लेकिन सरकारी चैनल के जरिए मनमाफिक दाम न मिलने से ग्रामीण तस्करों के हाथों माल बेचने को तरजीह देते हैं।

वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक दशोली प्रखंड के बुग्याली क्षेत्रों में कीड़ा जड़ी तलाशने वाले ग्रामीणों के आगे एक तस्कर ने जिंदा कीड़ों को ढूंढ निकालने पर ऊंचे दामों की पेशकश की है। एक तस्कर को बुग्यालों में आइस बॉक्स लेकर घूमते देखा जा रहा है। बताते हैं कि आइस बॉक्स में रखकर जिंदा कीड़ों को चीन सहित अन्य देशों में ले जाया जा रहा है।

कैसे बनती है कीड़ा जड़ी
साल के ज्यादातर दिनों में बर्फ से ढके क्षेत्रों में तीन से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर एक भूमिगत कीड़ा पनपता है। मई माह में इन क्षेत्रों में जब बर्फ पिघल जाती है तो यह कीड़ा मर जाता है और इसके लार्वा से एक जड़ी बनती है। यह जड़ी करीब डेढ़ माह तक जमीन के बाहर सूखी जड़ की तरह दिखती है।

कहां पाई जाती है
चमोली जनपद में जोशीमठ का नीति और माणा घाटी, तपोवन, करछौं, उर्गम, पाणा-ईराणी, झींझी, घुनी, रामणी, देवाल, वाण, कनौल आदि ऊंचाई वाले क्षेत्र। स्थानीय ग्रामीण मई और जून में इन स्थानों में बाकायदा कैंप कर कीड़ा जड़ी की खोज करते हैं।

अतिरिक्त ऊर्जा बढ़ाती है कीड़ा-जड़ी
कीड़ा-जड़ी का वानस्पतिक नाम यारसागंबू है। यह शक्तिवर्द्धक जड़ी है। इसका उपयोग चीन में शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों है कीमत
एक किलो कीड़ा जड़ी की कीमत एक करोड़ तक देने के लिए चीन और नेपाल के व्यापारी तैयार रहते हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने गोपेश्वर-गैरसैंण के दौरे पर पर्वतीय इलाके में कीड़ा जड़ी के सदुपयोग और विपणन की सरकारी व्यवस्था करने की बात कही थी। इससे उम्मीद बंधी थी कि अब कीड़ा जड़ी की तस्करी पर रोक लग पाएगी।

-कीड़े का जब लार्वा पीरियड होता है तो उसी दौरान यह किसी जड़ी पर अटैक कर उससे भोजन ग्रहण करता है। इसके बाद वहां बर्फ पड़ जाती है, जिससे कीड़ा वहीं दब जाता है। जब बर्फ पिघल जाती है तो यह कीड़ा मरकर जड़ी के रूप में जमीन से बाहर निकल जाता है। चीन में कीड़ा जड़ी का कृषिकरण हो रहा है। हो सकता है किसी रिसर्च के लिए जिंदा कीड़ा ले जाया जा रहा हो।
-डीके सिंह, डीएफओ, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग, गोपेश्वर

-बुग्यालों में पनपने वाले इन कीड़ों को लैब में विकसित किया जा सकता है। लैब में इस कीड़े पर शोध करके भविष्य में इस बेशकीमती जड़ी को उत्पन्न किया जा सकता है।
-डॉ. आरसी सुंदरियाल, निदेशक, जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान

-कीड़ा जड़ी को लाइफ चिप भी कहा जाता है। यह एक शक्तिवर्धक जड़ी है। इसका उपयोग सिर्फ पाउडर बनाकर किया जाता है। विदेशों में इस पाउडर को कैप्सूल में डालकर प्रयोग में लाया जाता है। यह कैप्सूल दूध, हनी और एल्कोलिक डेवरेज के साथ अलग-अलग रोगों के लिए अलग-अलग ढंग से प्रयोग में लाई जाती है। यह कैप्सूल सैक्सुअल ताकत, सुंदरता बढ़ाने और शरीर को तेज प्रदान करती है।
डॉ. बीपी भट्ट, प्रवक्ता, वनस्पति विज्ञान, पीजी कॉलेज, गोपेश्वर।

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